भाई मति दास भाई सती दास और भाई दयाल दास

भाई मति दास भाई सती दास और भाई दयाल दास

Bipinladhava

भाई मति दास भाई सती दास और भाई दयाल दास 

बलिदान 9 नवंबर 1675 मार्गशीर्ष सुद पंचमी विक्रम संवत 1732 

सिख इतिहास के सबसे बड़े नाम है इनका , तीनों गुरु तेग बहादुर के शिष्य , तीनों औरंगज़ेब के खिलाफ लड़े और वीरगति को प्राप्त हुए !

भाई मति दास का शरीर आरी से दो हिस्सों में चीर दिया गया 

भाई सती दास को खौलते तेल में तला गया और फिर कोयले में भुन दिया गया 



भाई दयाल दास को ज़िंदा जला दिया गया !

उसके बाद गुरु तेग बहादुर का सर भी कलम कर दिया गया !

क्या आप जानते हैं ये सब कहाँ हुआ ?

पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक की सुनहरी मस्जिद के पास वाले थाने में 

हाँ वही दिल्ली जहाँ औरंगज़ेब के नाम से एक रास्ता  है !

और भाई मति दास गुमनाम हो गए , हम एहसान फरामोशों की भीड़ में !

शत शत नमन बलिदानीओ को वंदे मातरम् जय हिंद
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