शालिगराम शुक्ल
बलिदान 1 दिसंबर 1930
माँ भारती के इस वीर सपूत का नाम और माँ भारती की आजादी के लिये दिये गये बलिदान को कम ही लोग जानते हैं ।शालिगराम शुक्ल कानपुर (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले थे।शहीद चंद्रशेखर आजाद के गुप्त संगठन हिन्दुस्तान रिपब्लिकन आर्मी के कानपुर केन्द्र के चीफ शालिगराम शुक्ल जी थे ।
शालिगराम शुक्ल ने चंद्रशेखर आजाद से पिस्तौल चलाने का प्रशिक्षण लिया था ।कानपुर प्रवास के समय चंद्रशेखर आजाद और शालिगराम शुक्ल अपने संगठन हिन्दुस्तान रिपब्लिकन आर्मी को और मजबूत करने की योजना बनाने हेतु तत्कालीन डी. ए. वी. हाईस्कूल में बैठक किया करते थे । शालिगराम शुक्ल डी.ए.वी कालेज छात्रावास में ही रहते थे । चंद्रशेखर आजाद अपने कानपुर प्रवास के समय अक्सर शालिगराम शुक्ल के पास ही रुकते थे ।
1 दिसंबर 1930 के दिन पौ फटने के करीब एक घंटे बाद शालिगराम शुक्ल जब डी.ए.वी. कालेज छात्रावास की ऊपरी मंजिल से उतरकर नीचे आए और फाटक पर पहुंचे तो अचानक ही सी.आई.डी. इंस्पेक्टर शंभु नाथ ने उनका हाथ पकड़ लिया ।
शालिगराम शुक्ल को यह समझते देर न लगी कि चंद्रशेखर आजाद के यहाँ मौजूद होने का भेद पुलिस को मिल गया है ।
शालिगराम शुक्ल जी ने एक ही झटके में अपने को मुक्त कर लिया और इंस्पेक्टर शंभु नाथ पर गोली चलाई । इंस्पेक्टर शंभू नाथ दीवार से सटे नाले में कूद गया, नाले में ही छिपे सिपाही बाहर आ गए ।
शालिगराम शुक्ल पूरी तरह से घिर गए । शालिगराम शुक्ल ने चिल्ला कर आस पास रहने वाले अपने साथियों को सावधान कर दिया । चंद्रशेखर आजाद शालिग्राम शुक्ल की ओर मदद के लिये लपके पर परिस्थिति भांपते ही वे मजबूर गए ।
चंद्रशेखर आजाद चाहते थे कि पुलिस पर पीछे से आक्रमण कर शालिगराम शुक्ल की सहायता की जाए, लेकिन सौ सवा सौ पुलिस वालों से दौ चार व्यक्तियों का मुकाबला व्यर्थ था, फिर उनके अन्य साथी भी इस योजना से सहमत नहीं थे ।
ऐसी विषम स्थिति में भी पिस्तौल की पांच गोलियों से शालिगराम शुक्ल ने पांच पुलिस वालों को गंभीर रूप से घायल कर दिया । पुलिस की गोली से शालिगराम शुक्ल भी गंभीर रूप से घायल हो गए और उसी दिन शालिग राम शुक्ल शहीद हो गए ।
शत शत नमन वंदे मातरम् जय जवान जय हिंद