19 दिसंबर : दीव दमण गोवा का आजादी दिन

19 दिसंबर : दीव दमण गोवा का आजादी दिन

Bipinladhava




19 दिसंबर : दीव दमण गोवा का आजादी दिन 
 
1961 मे भारतीय सेना ने गोवा को पूर्तगालियों से स्वतन्त्र कराने में जी जान एक कर दिए थे। एक तरफ तो जहां देश के लोगों ने अंग्रेजों की सैकड़ों सालों की गुलामी से मुक्ति पाई थी तो वहीं लोग अभी पाक विभाजन को भई नहीं भूल पाए थे। इसके बाद पुर्तगालियों द्वारा गोवा पर कब्जा करना लोगों व नेताओं के लिए बड़ी समस्या बन रही थी। धीरे-धीरे गोवा को आजाद करने की मांग देशभर में फैल गई। उधर सरकार भी गोवा की आजादी के लिए गंभीरता से सोचने लगी लेकिन पुर्तगाली गोवा को किसी भी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं थे। पुर्तगालियों ने आजादी के 14 साल बाद तक गोवा व दमन दीव पर अपना कब्जा जमाये रखा। उधर भारत भी हर कीमत पर गोवा को पुर्तगालियों से आजाद करना चाहता था यही नहीं गोवा में रहने वाले लोग भी पुर्तगालियों से मुक्ति चाहते थे, इसी लिए वह भी अपने तरीके से इन घुस पेटियों का विरोध कर रहे थे !

गोवा आजादी मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री  जवाहर लाल नेहरू और रक्षा मंत्री कृष्ण मेनन के बार-बार आग्रह के बावजूद पुर्तगाली भारत के आगे कतई भी झुकने को तैयार नहीं थे। उस समय दमन दीव भी गोवा का हिस्सा हुआ करता था। उधर पुर्तगाली यह सोचकर आराम से बैठे थे कि भारत गोवा की आजादी के लिए कभी भी सैन्य शक्ति के इस्तेमाल  नहीं करेगा क्योंकि वह हमेशा ही इसकी निन्दा करता आया है। पुर्तगाली भारत की अहिंसा को उसकी बुजदिली समझ बैठे जो उनकी सबसे बड़ी भूल थी। गालियों के इस रुख को देखते हुए नेहरू और मेनन को कहना पड़ा कि अगर पुर्तगाली गोवा को अहिंसा से नहीं छोड़ेगें तो हमें मजबूरन ताकत का प्रयोग करना पड़ेगा !

मगर पुर्तगाल ने जब भारत की बात को अनसुना कर दिया तो सरकार ने नवम्बर 1961 में भारतीय सेना के तीनों अंगों को युद्ध के लिए तैयार रहने के लिए कहा।  त्तकालीन मेजर जनरल केपी कैंडेथ को 17 इन्फैंट्री डिवीजन और 50 पैरा ब्रिगेड का जिम्मा सौंपा गया। भारतीय सेना की तैयारियों के बावजूद पुर्तगालियों की अकड़ नहीं गई। आपको बता दें कि हमारी वायु सेना के पास उस समय छह हंटर स्क्वाड्रन और चार कैनबरा स्क्वाड्रन थे। गोवा अभियान में हवाई कार्यवाही की जिम्मेदारी एयर वाइस मार्शल एरलिक पिंटो के सौंपी गई थी !



भारतीय सेना ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने के साथ आखिरकार 2 दिसंबर को गोवा मुक्ति का अभियान शुरू कर दिया। वायु सेना ने आठ और नौ दिसंबर को पुर्तगालियों के ठिकाने पर अचूक बमबारी की। थल सेना और वायु सेना के हमलों से पुर्तगाली तिलमिला गए। आखिरकार 19 दिसंबर 1961 को तत्कालीन पुर्तगाली गवर्नर मैन्यू वासलो डे सिल्वा ने भारत के सामने अपनी हार स्वीकारते हुए आत्म समर्पण कर दिया और समझौते पर दस्तखत कर दिए। इस तरह भारत ने गोवा और दमन दीव को मुक्त करा लिया और वहां पुर्तगालियों के 451 साल पुराने औपनिवेशक शासन को खत्म कर दिया। गोवा आजादी युद्ध में 22 भारतीय सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए तो वहीं 30 पुर्तगाली भी मारे गए !

इस युद्ध में घायल पुर्तगालियों की संख्या 57 थी तो भारतीयों की संख्या 54 थी। इसके साथ ही भारत ने 4 हजार 667 पुर्तगालियों को बंदी बना लिया था। ये अंग्रेजों से आजादी पाने के बाद ये भारत के लिए एक और बड़ी कामयाबी थी !

यहां आपको बता  दें कि आजादी से पहले दमन दीव गोवा प्रशासन से जुड़ा था लेकिन 30 मई 1987 में इसे अलग से केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1987 में गोवा को पूर्ण राज्य दिलाने में अहम भूमिका निभाई। गोवा को पुर्तगाली शासन से मुक्त कराने के लिए स्थानीय लोगों के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब सहित देश के विभिन्न हिस्सों के स्वतंत्रता सेनानियों ने अहम योगदान दिया था। गोवा और दमन दीव में हर साल 19 दिसंबर को मुक्ति दिवस मनाया जाता है !



जय जवान जय हिन्द जय हिन्द की सेना !
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