कुँवर रणजीत सिंह यादव
1857 क्रांति के नायक
भारतमाता को गुलामी की ज़ंजीरों से मुक्त कराने के लिए भारत समेत बिहार में क्रांति की ज्वाला फूटी।
बिहार के भोजपुर जिले के वृद्ध परमार राजा कुँवर सिंह ने भी भारतमाता की आज़ादी के लिए अपना सर्वत्र त्यागने की शपथ ली।
लेकिन अपने वृद्ध उम्र के कारण कुँवर सिंह अंग्रेजों से अकेले लोहा लेने में असमर्थ थे।
भोजपुर जिले के ही शाहपुर ठिकाने के जागीरदार कुँवर रणजीत सिंह जी यादव जो कुँवर सिंह के करीबी मित्र थे, इन्होनें कुँवर सिंह के संग मिलकर क्रांति की मशाल को बिहार में आगे बड़ाया।
रणजीत सिंह यादव ने कुँवर सिंह की सेना का नेतृत्व करते हुए अंग्रेजों से लोहा लिया।
कुँवर रणजीत सिंह जी यादव ने बिहार के क्षत्रिय यदुवंशी अहीर रणवीरों को उनके गौरवशाली क्षत्रिय इतिहास और पूर्वजों की याद दिलाते हुए जंग-ए-आज़ादी के लिए जोश से भर दिया।
शाहपुर के जागीरदार वीर कुँवर रणजीत सिंह यादव मूलत: कृष्णौत गोत्र के यदुवंशी थे जिन्हें वृष्णि वंशी अहीर कहा जाता है।।
साड़े 6 फीट लंबा भीमकाय शरीर, बड़ी रौबदार मूँछें, भारी आवाज़ इनके शानदार व्यकतित्व की पहचान थी।
आखिरकार 1857 का वो ऐतिहासिक दिन आगया और कुँवर सिंह के संग मिलकर रणजीत सिंह और उनकी यादव सेना फ़िरंगियों के सामने शमशीरें उठाए तैयार खड़े थे।
हर हर महादेव का रणघोष कर कुँवर सिंह और रणजीत सिंह यादव अपने यादव वीरों के संग मिलकर फ़िरंगियों का लहू रणचंडी को समर्पित करने लगे।
युद्ध करते करते वीर परमार कुँवर सिंह वीरगति को प्राप्त हुए।
इसके बाद युद्ध की कमान स्वयं कुँवर रणजीत सिंह यादव ने अपने हाथों में ली क्योंकि शहीद कुँवर सिंह के छोटे भाई ने अंग्रेजों से डरकर अंग्रेजों से संधि करली।
लेकिन वीर रणजीत सिंह यादव और उनके यदुवंशी वीरों ने हार नहीं मानी और पूरे आरा और भोजपुर जिले की धरती से अंग्रेजों को खदेड़ पूरे इलाके पर स्वतंत्र आधिपत्य स्थापित किया।
शाहबाद गजेटियर के अनुसार अंग्रेजों को धूल चटाने के बाद अंग्रेजों की हिम्मत नहीं पड़ी की वो वहां के अहीरों से कर भी वसूल कर पाएं।
1857-58 के मध्य वीर कुँवर रणजीत सिंह यादव और अंग्रेजों के बीच कई बार युद्ध हुए।
शहीद कुँवर सिंह के सेनापति जगन्नाथ सिंह यादव ने भी रणजीत सिंह यादव का भरपूर सहयोग करते हुए अंग्रेजों को सबक सिखाया।
जगन्नाथ सिंह यादव आरा के फुलवा गाँव के जागीरदार थे।
आखिरकार वीर रणजीत सिंह यादव और उनके अहीर वीरों को अंग्रेजों ने छल से हरा बंदी बना लिया और कालापानी भेज दिया।
वीर जगन्नाथ सिंह यादव को अंग्रेजों ने दरबदर कर दिया और जगन्नाथ जी भारत से विस्थापित हो मॉरिशस जा बसे ।
वीर जगन्नाथ सिंह यादव की ही पाँचवीं पीढ़ी में यदुवीर अनिरुद्ध जगन्नाथ ने जन्म लिया जो मॉरिशस के प्रधानमंत्री भी बने।
शत शत नमन वंदे मातरम् जय हिंद