भीमाबाई होलकर

भीमाबाई होलकर

Bipinladhava


भीमाबाई होलकर 

जन्म 17 सितंबर 1795 इंदौर मृत्यु 28 नवंबर 1858

भीमाबाई होल्कर का जन्म 17 सितंबर 1795 को इंदौर के महाराजा यशवंत राव होल्कर के यहां हुआ था। वे मल्हार राव होल्कर (द्वितीय) की बड़ी बहन थीं।

1817 में भीमाबाई होल्कर ने अंग्रेज सेनापति Colonel Malcolm के विरूद्ध गोरिल्ला युद्ध लड़ा जिसमें अंग्रेजों की बुरी हार हुई और भीमाबाई होल्कर विजयी हुईं।



माहिदपुर में 21 दिसंबर 1817 में फिर अंग्रेजी सेना ने थाॅमस हिस्लोप के नेतृत्व मे होल्कर सेना पर आक्रमण कर दिया।

होल्कर सेना की तरफ से 20 वर्षीय वीरांगना भीमाबाई होल्कर ने 2500 घुड़सवारों के साथ मोर्चा संभाला और अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी। होल्कर सेना की ओर से 63 तोपों के साथ रोशन बेग ने अंग्रेज़ो पर हमला किया। घमासान युद्ध हुआ। अंग्रेजो ने छल से होल्कर कैंप के सेनापति गफ़ूर खान को खरीद लिया गफूर खान ने गद्दारी करते  अपनी टुकड़ी की सेना को युद्ध से हटा लिया। लेकिन फिर भी भीमाबाई होल्कर ने हार नही मानी युद्ध जारी रखा। जिसमें अंग्रेजों के 2000 से ज्यादा सैनिक मारे गए ।

अपूर्णीय क्षति होने के कारण अंग्रेजों ने होल्कर राजपरिवार से संधि कर ली।

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने भीमाबाई होल्कर से ही प्रेरित होकर अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध छेड़ा ।

शत शत नमन वंदे मातरम् जय माताजी जय हिंद
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